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जहाँन को आजमाया है, तब जाना है।

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जहाँँन को आजमाया है, तब जाना है। लोगों को परखा है तब पहचाना है। माता-पिता जैसा कोई अपना नहीं उनसे दूर होना, इससे बुरा कोई सपना नहीं। नि:स्वार्थ जो प्रेम करे, वह मां-बाप है स्वार्थ के लिए जो साथ दे वह पालतू सांप है। दुनिया में अब हर कोई, दिमाग़ चलाता है इंसान तो क्या अब जानवर भी भाव खाता है। लोगों की सोच तो क्या, फ़ितरत भी बदल गई मतलब खत्म हुआ तो चाहत भी चली गई। आजकल अपनों को तो दूर, भगवान को भी नहीं पूछते विपत्ति ना पड़े तो, उन्हें भी नहीं पूजते। https://khushithought.blogspot.com

【मैं ऐसी नारी नहीं !】

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छोड़ दिया उसने तो टूट जाऊँ मैं ऐसी नारी नहीं।। पुनःडूब जाऊँ उसकी स्मृतियों में  आती ऐसी कारीगरी नहीं।। दुष्ट के साथ दुष्टता करूं मुझे ऐसी दुष्टता प्यारी नहीं।। पौरूष का जो दम्भ भरे, बुद्धि नहीं क्रोध से। प्रेम नहीं मोह से।। योग नहीं भोग से  काम और लोभ से।। उसने अपनी बुध्दिमत्ता को नहीं अपनी तुच्छता को दिखाया है। मैं क्यूँ डरूँ मैंने क्या गंवाया है।।  मेरा बस इतना दोष है कि मैं एक नारी, अभागिन, अबला, बेचारी हूं। ऐसा कहती दुनिया सारी है! किन्तु! यह मात्र एक भ्रम है सत्य नहीं असत्य है नारी ही शिव की शक्ति है ब्रह्माण्ड की भक्ति है।। नारी ही दुर्गा है नारी ही काली है नारी ही घर की निष्ठा है संसार की प्रतिष्ठा है।। अगर नारी सृजनकारी है, तो नारी ही  संहारकारी है।। जो अधर्मी, जो अत्याचारी है। जिनपर उनके ही पापों का बोझ भारी है। उनके लिए रौद्र रुप धारण कर बनती रूद्राणी है बनती रूद्राणी है.... /__________________________________\ https://khushithought.blogspot.com

【रूठ गई नींद आंखों से...】

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अच्छी नींद आ रही थी आज आंखों में, पर ना जाने क्यूँ लौट गई ख़ामोशी से।। शायद रूठकर चली गई यूं दबे पैरों से अच्छा! चलो चल के मनाया जाय।। ना जाने क्यूँ नाराज़ हो गई है मेरे आंखों से बहुत हुआ रूठना! अब उसे समझाया जाय।। पहुंच गए नज़दीक उसके, मकान पर  अब धैर्य के साथ दरवाज़ा खटखटाया जाए।। तनिक आहट सुनाई दी उसके आने की  आ गई! अब बातों का सिलसिला चलाया जाए।। वो कुछ बोलती कि! हमने ही सब कह सुनाया पर वो तो धैर्य की मूरत, चुपचाप सुनती रही।। खत्म हुआ मेरे मन का संशय, तब उसने फरमाया ये बड़ी बारीक-महीन बात है, क्या तुम्हें ज्ञात है।। मैं नींद हूँ, मैं बसती हूँ बड़े चैन से उन आंखों में जिस तन ने काम,क्रोध,लोभ को साधा हो  जिस मन में ना कोई बाधा हो जिन आंखों में तृप्त हर अभिलाषा हो द्रवित हो हृदय किन्तु जाग्रत आशा हो।। https://khushithought.blogspot.com