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फिर आना होगा तुमको!

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वृषभानु दुलारी देख रही पथ को रही निहार  पथिक आवत जात देख मन में उठत विचार। बीते पहर नैन अलसाई  मोहन संग क्यूं प्रीत लगाई।। ।।। आस   जगी फिर आस मिटी   उर चिंतित हुए बिन सुजान को  बावरी सी घूम रही जोगन बन पंछी डाली-डाली।। ।।। पात-पात पर लिख रही यही आज नहीं तो कल  कल नहीं तो कलियुग में  फिर आना होगा तुमको।। ।।। हे! जग के पालन हार करने इस जग का उध्दार फिर से करने दुष्टों का संहार फिर से पाने राधा का प्यार ।।। कर रहा प्रतिक्षा यह संसार फिर आना होगा तुमको हे! जग के पालन हार हे! जग के पालन हार।।                                                                -©®K.K.Leelanath✍ https://khushithought.blogspot.com

मातृ दिवस पर विशेष चर्चा।

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" मांं"  वह शब्द है जिसमें अर्थ ही अर्थ है; जिसकी तुलना किसी और से करना व्यर्थ है। इस रिश्ते का कोई मोल नही है; यह रिश्ता सबसे अनमोल है। यदि हम मां के बारे में चर्चा करें तो शायद शब्द कम पड़ जाएंगे।  यदि हम ज़िक्र करें इक मां और बच्चे के रिश्ते के बारे में तो शायद ही उसे शब्दों में पिरोया जा सकता है। क्योंकि मां शब्द अपने आप में बहुत ही विस्तृत है। यदि हम बात करें "क्या होती है इक मां की भूमिका हमारे जीवन में ?" तो शायद ही उसके स्वरूप को भली-भांति व्यक्त किया जा सकता है। मां ही हमारी जननी है, मां हमारा पालन-पोषण करती है, मां ही हमारे खुशियों का ख़्याल रखती है, और हर वक्त व हर पल मां ही हमारे साथ खड़ी होती है। इसीलिए मां का होना बेहद ज़रूरी है, इसलिए मां का सम्मान करें और अपने ख़्याल से पहले रखें मां का ख़्याल, क्योंकि बिना मां के नहीं बनती किसी की ज़िंदगी मिसाल। मां का रिश्ता होता ही बहुत खास है, बहुत ही प्यारा-निराला और सर्वोपरि सबसे ऊपर होता है मां का रिश्ता। मां का रिश्ता भगवान् से भी ऊपर होता है, क्योंकि हर वक्त, हर पल, हर जगह भगवान् नही पहुं...