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【रूठ गई नींद आंखों से...】

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अच्छी नींद आ रही थी आज आंखों में, पर ना जाने क्यूँ लौट गई ख़ामोशी से।। शायद रूठकर चली गई यूं दबे पैरों से अच्छा! चलो चल के मनाया जाय।। ना जाने क्यूँ नाराज़ हो गई है मेरे आंखों से बहुत हुआ रूठना! अब उसे समझाया जाय।। पहुंच गए नज़दीक उसके, मकान पर  अब धैर्य के साथ दरवाज़ा खटखटाया जाए।। तनिक आहट सुनाई दी उसके आने की  आ गई! अब बातों का सिलसिला चलाया जाए।। वो कुछ बोलती कि! हमने ही सब कह सुनाया पर वो तो धैर्य की मूरत, चुपचाप सुनती रही।। खत्म हुआ मेरे मन का संशय, तब उसने फरमाया ये बड़ी बारीक-महीन बात है, क्या तुम्हें ज्ञात है।। मैं नींद हूँ, मैं बसती हूँ बड़े चैन से उन आंखों में जिस तन ने काम,क्रोध,लोभ को साधा हो  जिस मन में ना कोई बाधा हो जिन आंखों में तृप्त हर अभिलाषा हो द्रवित हो हृदय किन्तु जाग्रत आशा हो।। https://khushithought.blogspot.com

【नाट्य विवरण】

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 नाटक:- "सीता परित्यागः" उ.प्र. संस्कृत संस्थानम् एवम् (आईकैड) इन्स्टीट्यूट ऑफ कल्चरल एण्ड एस्थेटिक डाइमेंशन्स के संयुक्त तत्वाधान में एक मासात्मक संस्कृत नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला की प्रस्तुति "सीता परित्यागः"  का सफल मंचन दिनांक 8 नवंबर, 2019 को "बी. एम. शाह प्रेक्षागृह, बीएनए परिसर" में हुआ। आलेख:- डॉ नवलता परिकल्पना एवं निर्देशन:- चित्रा मोहन कार्यशाला/संस्कृत प्रशिक्षण:- संध्या रस्तोगी। _______________________________________ नाटक:- "अंधेर नगरी"   भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की कालजयी नाटक अंधेर नगरी का सफल मंचन सांस्कृतिक विभाग के सहयोग से  30 सितम्बर, सोमवार को राय उमानाथ बली सभागार में किया गया। नाटक के निर्देशक के रूप में माननीय योगेंद्र कुमार जोशी व माननीय विपिन कुमार जी की सहभागिता रही।  _____________________________________  नाटक:- "बिस्तर में इतिहास"   का मंचन 01/01/2019 को रायउमानाथ बली प्रेक्षागृह में हुआ। इस नाटक का लेखन युवा रंगकर्मी 'नागपाल' एवं निर्देशन युवा रंगकर्मी ...